Income Tax Tds Explained : Salary में TDS आखिर क्यों कटता है, क्या है इसके पीछे की बजह, इनकम टैक्स लेटेस्ट न्यूज़ 2023

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Tax Deduction System Full Explained in hindi : टीडीएस (tds) यानी की टैक्स डिडक्शन सिस्टम, भारत का एक ऐसे सिस्टम जो भारतीय सरकार को एक अच्छा मूल्यवान फण्ड जनरेट करने में मदद करता है इसी के साथ यह Middle Class Families पर कभी कभी हावी भी दिखाई देता है। आज इस Blog Post में हम आपको यह टैक्स डिडक्शन सिस्टम को लेकर एक एक्सपर्ट ओपिनियन समेत टीडीएस से जुड़े कई राज आपके साथ शेयर करेंगे जिससे आपको टीडीएस को लेकर हर वो बात पता हो जो एक भारतीय Taxpayer को मालूम होना चाहिए। 


 

The Financial Express की हालिया आई एक रिपोर्ट में यह मालूम चला है की भारत में करीब 2 लाख से अधिक लोगो ने Financial Year 2022 – 2023 ने ITR यानी की Income Tax Return भरा है वही केंद्र सरकार के बजट सत्र में लाये गए टैक्स स्लैब के बदलाबो के कारण इस ITR भरने के Overall Ratio पर भी इसका असर देखने के लिए मिला है जहा पर अब टैक्स देने वालो की तादाद पिछले बर्ष से करीब 40 फीसदी तक कम दिख रही है (2023 के अनुमानित डाटा के हिसाव से) तो चलिए और ज्यादा बारीकी से समझते है इस टैक्स सिस्टम के बारे में।

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आखिर क्या है यह टैक्स डिडक्शन सिस्टम?

कर कटौती प्रणाली (tds) भारतीय सरकार द्वारा समाज की भलाई के लिए मंत्रालय को विनियमित करने के लिए विकसित एक प्रणाली है, क्योंकि सरकार द्वारा करों के रूप में एकत्र किए गए सकल कर का भुगतान नागरिकों को या तो विकास के नाम पर किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर हो या अर्थव्यवस्था का समग्र विकास, यहां हमने चर्चा की थी कि कर्मचारियों के वेतन से टीडीएस क्यों काटा जा रहा है।

TDS के नियम किस कानून अधिकार के अधीन आते है?

टीडीएस भारतीय सरकार के कानून के तहत आता है जो कि Income Tax Act, 1961 है, भारत के अंतिम शासन के लिए राजस्व के एक हिस्से के रूप में व्यक्ति को मिलने वाले वेतन पर कर लगाया जाता है।

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क्या सिस्टम है जिसके जरिए कर्मचारी के वेतन से राशि काटी जा रही है?

जानकारी के अनुसार TDS यह कुछ मुख्य कारणों की बजह से भी काटा जाता है जो की कुछ इस प्रकार है 

  1. Monthly Salary
  2. Rent Payment 
  3. Commision 
  4. Interest on bank fd and many more 
  5. Lottery Winning or tournament winnings

[Note : यह कुछ ख़ास स्लैब्स है जिन पर टीडीएस का कर लगाया जाता है परंतु यह केवल यहाँ तक ही सिमित नहीं है]    

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अगर टीडीएस को आसान शब्दों में समझा जाए तो इस फण्ड को तब काटा जाता है जब कर्मचारियों के बेतन जारी किये जाते है वही यह टैक्स काटने की जिमेदारी Employer की होती है जो भविष्य में कर्मचारी को सभी लीगल दिक्कतों से बचाने के लिए खुद ही टैक्स काट लेते है हालांकि, यह सभी स्टेटमेंट उस इम्प्लॉयर को दिखाने पड़ते है तो tax के रूप में काटी गई राशि को समय रहते इनकम टैक्स तक जमा कराना होता है। 

फाइनेंसियल ईयर का स्टेटस चेक कर सकता है कर्मचारी 

Employer द्वारा सैलरी से काटे जा रहे Tds को कोई भी कर्मचारी साल ख़त्म होने के बक्त भरे जाने वाले ITR RETURN के बक्त यह चेक कर सकता है की उसकी सैलरी से कितना हिस्सा टैक्स के रूप में काटा गया था वही यह यह भी देख सकता है की TAX काटने वाले Employer ने क्या वह टैक्स की राशि समय रहते इनकम टैक्स को जमा भी की थी नहीं और अगर कोई भी दस्ताबेज में उसको कमी लगती है तो वह इस मामले को लेकर या तो अपनी company के Hr (Hiring Representative) से बात कर सकता है, अगर इन सभी के बाद भी अगर उसको सही जानकारी नहीं मिलती है तो वह खुद income tax की वेबसाइट पर जाकर इनकम टैक्स को मामले के बारे में बता सकता है।   



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