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कुछ इस तरीके से मोटी कमाई करती है, अडानी को बर्बाद करने वाली hindenburg research फर्म

गौतम अडानी भारत के बड़े बिजनेसमैन हैं। वह अपने कारोबार में बहुत शानदार प्रदर्शन कर रहे थे। 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार 2021 में अडानी ग्रुप ऑफ कंपनी का मार्केट कैपिटल करीब 100 बिलियन का हुआ करता था जो दिसंबर 2022 के तिमाही तक आते आते करीब ₹18.13 लाख करोड़ का था जो हिंडेनबुर्ग की रिपोर्ट से गिराकर सीधे 13.90 लाख का ही रह गया।

How Hindenburg Earns Money
Hindenburg Research Report On Adani Scam : News Duniya Pvt Ltd

   
HindenBurg Research Latest News : अडानी समूह के लिए हिंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट एक काल बनकर आई। जिसके कारण अडानी समूह को करीब 96% के एक बड़े घाटा से गुजरना पड़ा है। इस बड़े घाटे में न केवल अडानी को नुकसान हुआ है बल्कि देश की मोदी सरकार को भी विपक्ष ने एक करारा जवाब दे दिया है। वही देश की जनता की बात करें तो जनता को अपनी एलआईसी में जमा पैसे समेत सरकार से डर सताने लगा था। यानी कि Hindenburg Research की रिपोर्ट ने भारत में भूचाल लाने का काम किया था। वही आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे हिंडनबर्ग के कुछ ख़ास राज।

Some Important Points Covered :

  • यह है हिंडनबर्ग रिसर्च के मालिक 
  • इन लोगो के लिए तैयार होती है रिपोर्ट 
  • क्या अडानी को नुक्सान पहुंचाकर हिंडनबर्ग का हुआ फायदा 
  • अडानी के FPO के पहले ही क्यों आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 

    यह है हिंडनबर्ग रिसर्च के मालिक 

    Nathan Anderson

    हिंडनबर्ग के मालिक का नाम नाथन एंडरसन है वही नाथन एंडरसन के बारे में जानकारी मिली है कि नादान एंडरसन एक समय पर इस्राएल में एंबुलेंस चलाया करते थे जिसके बाद वह एक इंवेस्टर बांके उभरे जिसके बाद उन्होंने खुद की एक बिजनिस फर्म शुरू की जिसका नाम था HindenBurg,  इस संस्था के माध्यम से पूरे देश भर की कंपनियों की जांच की जाती है और मनी लॉन्डरिंग, स्टॉक मैनीपुलेशन जैसे प्राप्त मामलों पर आधार बनाकर हिंडनबर्ग रिसर्च अपनी एक रिपोर्ट तैयार करती है। 

    इन लोगो के लिए तैयार होती है रिपोर्ट 

    1. हिंडनबर्ग रिसर्च अपनी इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट के लिए इस रिपोर्ट को तैयार करती है वही रिपोर्ट के बदले में हिंडनबर्ग एक मात्रा से उन क्लाइंट्स से पैसा चार्ज करती है। 
    2. हिंडनबर्ग रिसर्च को लेकर यह खबर मिली है कि हिंडनबर्ग शॉर्ट सेलिंग का भी काम करती है। यानी कि पहले शेयर्स को कम प्राइस पर बेचा जाता है जिसके बाद एक मोटी प्राइस पर उठाया जाता है। जिसकी मदद से हिंडनबर्ग एक अच्छा खासा रेवेन्यू जनरेट करती है। 
    3. रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग पैसे के बदले अपने क्लाइंट्स को कई तरीके की सर्विस देती है जिसकी मदद से कंपनी अधिक रेवेन्यू बना पाती है। 

    क्या अडानी को नुक्सान पहुंचाकर हिंडनबर्ग का हुआ फायदा 

    स्टॉक ट्रेडिंग और इंस्टीट्यूशनल ब्रोकिंग से ताल्लुक रखने वाले कई लोगों का यह एक कॉमन सवाल था कि आखिर क्यों हिंडनबर्ग ने अडानी समूह के FPO (Follow on Public Offer) के कुछ दिन पहले ही यह रिपोर्ट जानबूझकर साबित क्यों करी ?

    अडानी के FPO के पहले ही क्यों आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 

    तो इस बात पर अभी तक कोई भी उत्तर नहीं नहीं मिल पाया है परंतु मीडिया रिपोर्ट्स के माने तो हिंडनबर्ग रिसर्च ने इस रिपोर्ट को FPO के पहले ही क्यों लांच किया इस बात पर रिसर्च कंपनी पर शक जाहिर किया जा रहा है परंतु हिंडनबर्ग से जुड़ा यह सवाल आज भी सवाल बना हुआ है जिसका उत्तर इस समय किसी भी मीडिया पर उपलब्ध नहीं है। 

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