Sahara India News : सुब्रत रॉय सहारा को पनाह देते भारत के पीएम मोदी, सुब्रत रॉय सहारा के दोस्त पीएम मोदी की कहानी

Sahara India News : सुब्रत रॉय सहारा को पनाह देते भारत के पीएम मोदी, सुब्रत रॉय सहारा के दोस्त पीएम मोदी की कहानी

sahara india scam case study : एक तरफ देश में सहारा इंडिया से पीड़ित निवेशक सड़क पर उतर कर अपने पैसे की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ देश की केंद्र सरकार पता नहीं क्यों हो सहारा इंडिया परिवार को बचाने में लगी हुई है। देश में सहारा परिवार के खिलाफ बढ़ती एफआईआर और भुगतान की मांग लगातार प्रजोर होती जा रही है। जबकि देश की केंद्र सरकार सहारा इंडिया परिवार को संरक्षण देने का काम कर रही है। वहीं देश के विपक्ष ने भी कई बार भाजपा पर कड़े आरोप लगाते हुए सहारा से रिश्वत लेने की पोल खोली है। ऐसे में मोदी का इस मामले में ना देखना 2024 में भाजपा के लिए संकट बन सकता है। 

सोशल मीडिया पर मोदी के खिलाफ दावा 

सोशल मीडिया पर आजकल केंद्र सरकार के खिलाफ दावा किया जा रहा है। दावे के मुताबिक बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के नए आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार 2024 के इलेक्शन में सहारा का मामला प्रजोर तरीके से रख सकती है। "जिसके तहत केंद्र सरकार ने एक आदेश पास करते हुए कहा है कि सहारा मामले को 2024 तक लटका दिया जाए" (सूत्रों के अनुसार) ताकि 2024 के बल पर मोदी सरकार एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सके। क्योंकि मोदी सरकार के आगे अभी सबसे बड़ा रोड़ा देश की 12 करोड़ जनता है जिसमें से करीब एक दर्जन लोग ऐसे हैं जो सहारा  और पर्ल से पीड़ित है। ऐसे में मोदी सरकार सहारा के साथ गेम खेल रही है जबकि देश का निवेशक अपने पैसे की मांग कर रहा है। ऐसे में देखना है कि स्थिति किस ओर जाती है। 

एमपी बिधानसभा इलेक्शन में सहारा बन सकता है मुद्दा 

केंद्र सरकार के लिए मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव एक महत्व रखता है। ऐसे में कमलनाथ का प्रजोर तरीके से मध्यप्रदेश में वापसी का रास्ता तैयार करना और शिवराज सरकार का डगमगाना कहीं ना कहीं दिखाई दे रहा है कि शिवराज सरकार अब वापसी करने में विफल रह सकती है। जिसमें से सबसे बड़ा मामला सहारा इंडिया का मामला है। निवेशकों ने कहा है कि अबकी बार अगर शिवराज सरकार ने सहारा मामले पर कोई भी कार्रवाई नहीं की तो नोटा का बटन दबाएंगे या तो किसी अन्य पार्टी को मत देंगे परंतु भाजपा को वापस आने नहीं देंगे। खबर है कि मध्य प्रदेश में सहारा इंडिया के खिलाफ एफआईआर का आंकड़ा 500 पहुंच गया है। जबकि शासन में बैठी सरकार उस मामले पर कार्रवाई नहीं कर रही है ऐसे में निवेशकों का गुस्सा होना जायज है। 

ठगने के लिए बना सहकारिता मंत्रालय 

सहारा इंडिया परिवार के निवेशकों से जब सहकारिता मंत्रालय के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने सहकारिता मंत्रालय बनाने में सिर्फ भारत के पैसे की बर्बादी की है बल्कि सहकारिता मंत्रालय तो आज भी वैसा चल रहा है जैसा पहले चला करता था। सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में लोगों का करोड़ों करोड़ पैसा फसा है जिसकी शिकायत लोगों ने भर-भर कर सहकारिता मंत्रालय तक पहुंचाई है परंतु सहकारिता मंत्रालय है कि कहता ही नहीं। मंत्रालय से कहा जाता है की "यह काम सेबी का है यह काम इनका है परंतु खुद कुछ कार्यवाही नहीं करता है" इसीलिए सहकारिता मंत्रालय सिर्फ मोदी सरकार ने पैसे की बर्बादी के लिए तैयार किया है। 

चिटफंड घोटाले से डूबी जनता 

सहारा, पल्स, आदर्श क्रेडिट जैसे अन्य मामलों को देखते हुए ऐसा दिखाई दे रहा है कि देश की जनता का आधा पैसा तो इन चिटफंड करने वाले चिटफंडियों ने दवा रखा है। देश में गरीबी का एक मुख्य उद्देश्य चिटफंड है जिसके माध्यम से करोड़ों लोग अपने जीवन भर की पूंजी कोई कंपनी में इसलिए रखते हैं क्योंकि केंद्र सरकार ने उनको लाइसेंस दिया होता है। अब लोगों की पूंजी तो डूब जाती है और केंद्र सरकार अपने हाथों में हाथ लेकर बैठी रहती है। ऐसे में केंद्र सरकार की कार्यवाही ना करना और देश के बिगड़ते LAW सिस्टम का हाल देश के लिए एक नेगेटिव संदेश देता है कि कहीं देश में वैचारिक मतभेद बढ़ते जा रहे हैं वही देश का कानून विफल रहा है। : नए तथ्यों के अनुसार

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