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मंगलवार 06 2022

गरीव एजेंट की हत्या के मामले में सहारा चैयरमेन सुब्रत रॉय फसे, सहारा इंडिया लेटेस्ट न्यूज़

डेस्क रिपोर्ट, डबरा : सहारा इंडिया मामले में एक बार फिर मामला गरमा गया है। जानकारी के मुताबिक ग्वालियर जिले के डबरा में एक एजेंट की आत्महत्या का मामला सामने आया था। जिसके बाद अब मामला सुर्खियों में है। जानकारी के मुताबिक पिछले वर्ष फरवरी महीने में एजेंट भूपेंद्र जैन ने रेल के सामने कटकर आत्महत्या कर ली थी। वजह सहारा इंडिया से भुगतान ना बताया जा रहा था वही एजेंट की मौत के बाद अब मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है जहा सहारा समूह के चैयरमेन अब मुसीबतो में है। 

भूपेंद्र को न्याय की गुहार 

सहारा इंडिया के एजेंट थे भूपेंद्र जिन्होंने 20 साल पूर्व सहारा कंपनी ज्वाइन करी थी। कंपनी ज्वाइन करने के बाद भूपेंद्र कई साल तक कंपनी से जुड़े रहे। वहीं उन्होंने लोगों का पैसा सहारा इंडिया में जमा कराया था क्योंकि सहारा एक सरकारी लाइसेंस प्राप्त कंपनी थी। वही सहारा लीगल केस के चक्कर में सहारा इंडिया ने भुगतान देना बंद कर दिया था। इस बात पर भूपेंद्र के निवेशक लगातार भूपेंद्र पर जोरदार दबाव बना रहे थे कि भुगतान कब मिलेगा। जब कंपनी ही भुगतान नहीं कर रही थी तो भूपेंद्र डिप्रेशन में आ गए वहीं डिप्रेशन के चक्कर में उन्होंने रेल के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। जिसके बाद एजेंट की हत्या हो जाने के मामले में सुब्रत रॉय सहारा पर अब एक साल बाद मामला दर्ज किया गया है। 

भूपेंद्र के सुसाइड नोट ने बयान की थी सच्चाई 

भूपेंद्र के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था। जिसमें उन्होंने सुसाइड करने की वजह बताई थी। सुसाइड नोट में  साफ़ तरीके से दोषी सहारा प्रबंधन को ठहराया गया था कि सहारा इंडिया पहले तो भुगतान नहीं कर रही और जब भुगतान मांगने जाते हैं तो उसके मैनेजर कमीशन खोरी करना चाहते हैं वहीं उन्होंने अपने सुसाइड नोट में 1 पॉइंट लिखते हुए यह भी बताया था कि उनकी हत्या का आरोपी सिर्फ और सिर्फ सहारा प्रबंधन है और सहारा समय पर भुगतान कर देती तो आज उनको यह स्थिति नहीं झेलनी पड़ती। जिसके चक्कर में उन्होंने अपनी जान गवा दी। जानकारी है कि भूपेंद्र ने अपने पीछे एक बेटा, एक बेटी सहित पत्नी को छोड़कर गए हैं। 

सहारा पर आरोप 

सहारा पर आरोप है की उसने भूपेंद्र को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करना / उकसाया  था वही भारतीय दंड सहिता के सेक्शन 306 के अनुसार इस सजा में  10 वर्ष कारावास एवं आर्थिक दंड दिया जाता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं हैवही सहारा प्रमुख सहित सभी प्रबंधन के लोगो के खिलाफ कड़क से कड़क सजा मिलनी चाहिए। 

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