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शुक्रवार 08 2022

privatisation in india 2022 : रतन टाटा के हाथों बिक गई एक और कंपनी, सरकारी कंपनी की बदल गई किस्मत

Privatisation in india 2022 : भारत में बढ़ते निजी करण के दौर से आज हर कोई वाकिफ है। जहां एक तरफ भारत में अब सरकारी कंपनियां प्राइवेट के हाथो जा रही हैं वही प्राइवेटाइजेशन बढ़ रहा है।  रतन टाटा के हाथ में जाते ही एक कंपनी की किस्मत बदलने लगी है। दरअसल यह कंपनी एक भारी घाटे में चल रही थी और यह प्लांट 30 मार्च 2020 से बंद था आइए जानते हैं इस प्लांट और इस प्रोजेक्ट के बारे में। 

आज से करीब 2 साल से बंद पड़ी सरकारी कंपनी नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) जैसे ही रतन टाटा के हाथों में आई। इसकी किस्मत चमकने लगी है। टाटा स्टील के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्र ने हमारे संवाददाता को बताया है कि नीलांचल इस्पात (Nilachal Ispat Nigam Limited) के कारखानों को अगले 3 महीने में शुरू करने का लक्ष्य कंपनी द्वारा रखा गया है। यानी कि कंपनियां बहुत जल्द खुलने वाली है। 

मैनेजिंग डायरेक्टर(maneging director) ने बताया कि कर्मचारियों(employees) के साथ काम करने के करीब 2 साल बंद पड़े रहने के बाद अब कारखाने को दोबारा शुरू किया जाएगा। दोबारा से कंपनी के बंद प्रोजेक्ट्स दोबारा तैयार किए जाएंगे वही अब कंपनी को एक बेहतरीन तरीके से चलाया जाएगा। इसके साथ ही 50,00,000 टन की क्षमता के साथ कंपनी को चलाने का लक्ष्य रखा गया है वहीं इसके लिए मंजूरी भी जल्द हासिल हो सकती है। 

दरअसल, नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड के टाटा ग्रुप की एक फार्म को सौंपा गया है. एक अधिकारी ने बताया है कि टाटा स्टील की यूनिट ने इस साल जनवरी में 12,100 करोड रुपए के मुख्य मूल्य पर एन आई एल में करीबन 93.71 फ़ीसदी हिस्सेदारी हासिल करने की बोली लगाई थी। दरअसल कंपनी ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड के साथ गठजोड़ को पीछे छोड़ते हुए एक सफलता हासिल की थी। 

बता दे कि यह कंपनी आज से कुछ समय पहले से ही घाटे में चल रही थी. लगातार कंपनी भारी घाटा झेल रही थी जिसके कारण कंपनी चलाना लगभग मुश्किल सा हो गया था। एक अधिकारी ने तो हमारे संवाददाता को यह भी बताया है कि कंपनी इतनी ज्यादा कर्ज में डूब चुकी थी कि कंपनी के इनपुट्स भी नहीं लगा पाए जा रहे थे।  जिससे कंपनी में भारी नुकसान भी झेलना पड़ रहा था इसी वजह से कंपनी को बंद कर दिया गया था वही कंपनी पर करीबन 6600 करोड रुपए से ज्यादा का कर्ज अभी बकाया है। 

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