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Sahara Group : दिल्ली हाईकोर्ट के खिलाफ सहारा इंडिया की बड़ी चाल , निवेशकों को बना सकती है मुर्ख

 

 न्यूज़ दुनिया वेब फोटो : CC 
सहारा इंडिया का पैसा कब मिलेगा 2022 : सहारा इंडिया लगातार अपनी चले चलने में एक माहिर कंपनी बन चुकी जहा एक तरफ सुब्रत रॉय सहारा निवेशकों को लगातार पलटी दे रहे है और तीन बार लाइव आकर निवेशकों को अपनी दुख की गाथा सुना चुके है परंतु निवेशकों को उससे 1 रूपये का भी फायदा नहीं पंहुचा है वही सहारा इंडिया के निवेशक की स्थिति पहले के मुताबिक लगतार ख़राब हो चुकी है। सहारा इंडिया में करीब 54.5 प्रतिशत निवेश गरीब और मध्यम बरगिये लोगो का पैसा फसा हुआ है जिसको न सरकार दिलाने को तैयार है और न सहारा इंडिया बापस देना चाहती है।     


सहारा इंडिया के प्रति एक जागरूक पॉइंट यह सामने आया है की सहारा इंडिया का निवेशक पैसा लेना के लिए केवल सड़क पर प्रदर्शन में ही मेहनत नहीं कर रहा है बल्कि अब कोर्ट में अर्जी लगाई जा रही है जिसको आधार मानते हुए लगातार सभी कोर्ट सख्ती अपना रहे है वही अगर बात दिल्ली हाई कोर्ट की करे तो दिल्ली उच्च न्यायलय ने सहारा इंडिया की सभी सोसाइटी को नया निवेश लेने से मन कर दिया था जिसके बाबजूद सहारा इंडिया ने अपनी रणनीति से एक नयी प्राइवेट कंपनी में निवेश करने के लिए कहा वही कुछ जगहों पर तो सोसाइटी में रोक के बाबजूद पैसा लिया गया है जिसकी एक कमेटी द्वारा उक्त जांच भी होनी चाहिए। 

10,000 तक का भुगतान कर रही चतुर सहारा इंडिया 

जो भी सहारा इंडिया का अधिकारी यह कहता है की सहारा इंडिया के पास फण्ड नहीं है सभी पैसा सेबी के पास है वो सब गलत है असल में सहारा इंडिया के पास पैसे की कमी नहीं है। आप इस का अंदाजा इन बातो से ही लगा सकते है की बिहार में सहारा इंडिया के खिलाफ एफआईआर ने काटना ,सरकार का हस्तक्षेप न करना वही जब बात लीगल में पैसा भेजने के आती है वैसे ही सहारा इंडिया का बैंक खुल जाता है। 



दिल्ली हाई कोर्ट की रोक लगने के बाद सहारा इंडिया यह बड़ी चाल अपनाने वाली है। जानकरी के मुताबिक देश के हर राज्य के हर छोटे से लेकर बड़े-बड़े ऑफिस में सहारा इंडिया ने फंड सहित कुछ लिस्ट भेजी है जिनको सहारा 10 हजार से निचे का भुगतान करने को राजी है वही निवेशकों को 10 हजार की माला पहनाकर संतुष्टि पत्र नाम से एक एफिडेविट पर निवेशकों के हस्ताक्षर लिए जा रहे है जिसको आधार बनाकर और निवेशकों को मुर्ख बनाकर सहारा इंडिया सुप्रीम कोर्ट जाकर स्टे का आर्डर लाना चाहती है और अपने NI (NEW INVESTMENT ) की रोक को हटबाना चाहती है। 

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