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सोमवार 06 2021

Sahara India Pariwar News :- इतनी f.i.r. के बाद कैसे बाहर घूम रहे हैं सुब्रत रॉय सहारा

 


  • जनता के पैसे को डकार ने के बाद भी कैसे गुलाब घूम रहे हैं सुब्रत रॉय सहारा f.i.r. होने के बाद भी क्यों नहीं हो पा रही है गिरफ्तारी
  • Made By Neeraj Sharma
ना इंसान ना भुगतान सिर्फ और सिर्फ परेशान

सहारा इंडिया परिवार एक समय देश में नंबर वन कंपनी बन चुका था जिसके फाउंडर श्री सुब्रत रॉय सहारा थे पर विगत 2012 और 13 से सहारा इंडिया परिवार की मुश्किलें लगातार बढ़ती गई जब से सहारा सेबी केस चालू हो गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी सहारा को आदेश दिया था कि वह निवेशकों का जल्द से जल्द भुगतान करें और कुछ पैसे की रकम भी सहारा को सहारा सेबी खाते में जमा करवानी थी जिसके चक्कर में निवेशकों को उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है और निवेशक लगातार परेशान हो रहे हैं और उनकी सुनने के लिए  ना कोई सरकारें हैं और ना ही इस देश का मीडिया उनकी बात सुन raha है |न्यूज़  4K इंडिया हमेशा उन गरीब अथवा उन एजेंटों के साथ में है जिन्होंने कभी भी गलत नहीं किया और अब जिनके साथ अन्याय हो रहा है उनको न्याय दिलाने की बात हमेशा न्यूज़ 4k इंडिया और सहारा निवेशक मोर्चा यूट्यूब चैनल हमेशा करत| रहेंगे और सच्चाई दिखाना ही हमारा कर्तव्य है और उस कर्तव्य से हम कभी नहीं चुकेंगे |

देश में 100 F.I.R हो जाने के बाद भी खुला घूम रहे हैं सुब्रत राय सहारा

जब किसी गरीब आदमी पर एक एफआईआर हो जाती है तो उसको 24 घंटे के भीतर जेल में कर Diya  जाता है और जब वही बात किसी अमीर आदमी की आती है तो उसको पैरोल पर बाहर Nikal Diya जाता है या तो फिर उसकी गिरफ्तारी नहीं होती है ऐसा ही हाल कुछ सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा का है देश में itna bada ghotala   हो जाने के बाद भी उनको तिहाड़ जेल से बाहर रखा जा रहा है और खुलेआम घूम रहे हैं अभी कुछ समय पहले सहारा निवेशक मोर्चा की तरफ से एक वीडियो जारी हुआ था जिसमें उन्होंने बताया था कि सुब्रत रॉय सहारा खुलेआम घूम रहे हैं और इसकी तहकीकात भी उनकी तरफ से की गई थी जिसमें यह बात तो सहारा लखनऊ में बीजेपी विधायक के घर के शादी में आनंद ले रहे थे और बात की पुष्टि की जा रही है कि O.P श्रीवास्तव सुब्रत राय सहारा के साथ में थे तो यह कैसे हो सकता है

दो चोर एक शादी में कैसे मजा ले रहे थे और इन को पुलिस ने क्यों नहीं पकड़ा जबकि UP में 2 दिन पहले ही इनके खिलाफ सिद्धार्थनगर में एक गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था और यह लोग आराम से शादी में फोटो खिंचवा रहे थे तो यह देश की राजनीति को व्यक्त करता है कि देश की राजनीतिGalat  हाथों में है और दोनों ही सरकारें चाहे सरकार की बात करें वही विपक्ष की बात करें तो  चुप बैठे हैं और कोई गरीबों की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहा है

२०१२ और २०१४ के बीच, जब उसकी समूह की दो फर्मों पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोप लगाया था और उसके प्रमुख सुब्रत रॉय को गिरफ्तार किया गया था, सहारा समूह ने तीन सहकारी समितियां बनाईं और चार करोड़ जमाकर्ताओं से ८६,६७३ करोड़ रुपये की जमा राशि एकत्र की।
इंडियन एक्सप्रेस
प्रदर्शन।
इन समितियों - और 2010 में स्थापित एक चौथाई - और उनकी जमा राशि को सरकार द्वारा लाल झंडी दिखा दी गई है, जिसने "अत्यधिक संदिग्ध" अनियमितताओं की जांच की मांग की है, जिसने जमाकर्ताओं की "कड़ी मेहनत" के तहत पैसा लगाया है "गंभीर" जोखिम।
नियामकों ने कहा कि एकत्र किए गए धन में से कम से कम 62,643 करोड़ रुपये का निवेश महाराष्ट्र के लोनावाला में एंबी वैली परियोजना में किया गया था। यह वही परियोजना है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में अटैच किया था और फिर 2019 में सहारा के जमाकर्ताओं को चुकाने के लिए संपत्ति की नीलामी के कई असफल प्रयासों के बाद जारी किया गया था।
बहु राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत गठित ये चार समितियां, और जो कृषि मंत्रालय के दायरे में आती हैं: सहारा क्रेडिट सहकारी समिति लिमिटेड (2010 में स्थापित); हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड; सहारन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड; और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
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18 अगस्त को, विवेक अग्रवाल, कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव, जो सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार भी हैं, ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) को सहारा समूह में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा जांच शुरू करने के लिए लिखा था।

रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड बताते हैं कि सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव ने लगभग 4 करोड़ जमाकर्ताओं से 47,254 करोड़ रुपये जमा किए और एंबी वैली लिमिटेड में 28,170 करोड़ रुपये का निवेश किया; Saharayn Universal ने अपने 3.71 करोड़ सदस्यों से लगभग 18,000 करोड़ रुपये एकत्र किए और 17,945 करोड़ रुपये का निवेश किया; हमरा इंडिया के पास 1.8 करोड़ सदस्यों से 12,958 करोड़ रुपये जमा हैं और उसने 19,255 करोड़ रुपये का निवेश किया है और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव ने 37 लाख सदस्यों से 8,470 करोड़ रुपये जुटाए हैं और एंबी वैली में 6273 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
एमसीए को लिखे अपने पत्र में, अग्रवाल ने कहा कि ये चार सोसायटी एंबी वैली लिमिटेड के शेयरों के लेनदेन में "काल्पनिक लाभ" का खुलासा करती हैं। "ये संस्थाएं शेयरों की बिक्री से आय दिखाती हैं जबकि इस तरह के हस्तांतरण केवल समूह की संस्थाओं के भीतर हुए हैं।"
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“इन चार सहकारी समितियों में करोड़ों भारतीय नागरिकों द्वारा की गई गाढ़ी कमाई और जमा राशि के क्षरण का गंभीर खतरा है। इस तरह के सभी जमा अब सहारा समूह की कंपनियों विशेषकर एंबी वैली की दया पर हैं, इसलिए जांच का आदेश देना जनहित में समीचीन है… ”अग्रवाल के पत्र में कहा गया है।
पिछले दो महीनों में, रिकॉर्ड दिखाते हैं, रजिस्ट्रार ने कई सुनवाई की और देश भर के कई जमाकर्ताओं और सदस्यों की भारी शिकायतों के आधार पर इन चार सहारा सोसायटियों के खिलाफ आदेश पारित किए।
17 अगस्त को, रजिस्ट्रार ने हमरा इंडिया को यह कहते हुए आरोपित किया कि एंबी वैली लिमिटेड में उसका निवेश "किफायत और ऋण सहकारी समिति के मूल सिद्धांत के खिलाफ था" और विस्तृत जांच की आवश्यकता है। उसी दिन, एक अन्य आदेश ने स्टार्स मल्टीपर्पज सोसाइटी की खिंचाई करते हुए कहा कि इसके प्रबंध निदेशक सोसायटी द्वारा दिए गए 1800 करोड़ रुपये के अग्रिम का विवरण प्रदान करने में सक्षम नहीं थे।
जुलाई में, रजिस्ट्रार ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव के एम्बी वैली में 28,000 करोड़ रुपये के "बड़े पैमाने पर" निवेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह "क्रेडिट और थ्रिफ्ट सोसाइटी के सहकारी सिद्धांतों के खिलाफ था।"
नियामक ने यह भी पाया कि सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य सहारा रियल एस्टेट लिमिटेड के भुगतान के रूप में सोसाइटी फंड से 2253 करोड़ रुपये भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को हस्तांतरित किए। हालाँकि, यह स्थानांतरण सुब्रत रॉय को अग्रिम के रूप में दर्ज किया गया था।
सहकारी समितियों के उपनियमों के अनुसार, एक समिति अपने धन को सहकारी बैंकों में निवेश कर सकती है; सरकारी सुरक्षायें; अनुसूचित बैंक; अन्य सहकारी समितियां; सहायक कंपनियां; सूचीबद्ध कंपनियां; और म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और सेबी द्वारा विनियमित इंडेक्स फंड।
इंडियन एक्सप्रेस ने अग्रवाल द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियों और जांच के लिए उनके आह्वान पर सहारा समूह को एक विस्तृत प्रश्नावली भेजी।

सहारा के एक प्रवक्ता ने जवाब दिया: “हमारी सोसायटी आम जनता से कोई जमा / योगदान स्वीकार नहीं कर रही है, हम केवल अपने सदस्यों से जमा / योगदान स्वीकार कर रहे हैं, जिन्हें हमारे समाज में मतदान का अधिकार है। हम अपने पैसे का निवेश अपने उप-नियमों के प्रावधानों के अनुसार कर रहे हैं, जिन्हें सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित किया गया था ... (जिसने) 2018 में स्वतंत्र चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्मों के माध्यम से हमारी समितियों का विशेष रूप से एक विशेष ऑडिट किया है और हम साफ हो गए ... वहां उपनियमों/अधिनियमों का उल्लंघन नहीं था। हम हमेशा किसी भी प्रकार के निरीक्षण/लेखापरीक्षा का स्वागत करते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि सहारा की सोसायटियों में 4 करोड़ जमाकर्ता सदस्य हैं और एंबी वैली लिमिटेड में निवेश किए गए पैसे का इस्तेमाल एंबी वैली के "विकास, संचालन और क्रेडिट मंजूरी" के लिए किया गया था।
हालांकि, रिकॉर्ड दिखाते हैं, इस साल जुलाई में, रजिस्ट्रार ने हमरा इंडिया, स्टार्स मल्टीपर्पज, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव और सहारन यूनिवर्सल को अपने सदस्यों से कोई भी नई जमा राशि लेने से "प्रतिबंधित" किया है।
जनवरी 2019 में, रजिस्ट्रार ने फैसला सुनाया कि एक सोसायटी के सदस्यों का योगदान जो एक निश्चित अवधि के लिए रखा जाता है, जैसा कि सहारा सोसाइटियों के मामले में होता है, एक जमा राशि के रूप में होता है। और सहकारी समितियों द्वारा प्राप्त ऐसी जमा राशि देश में पोंजी योजनाओं पर अंकुश लगाने के लिए शुरू किए गए अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के दायरे में आएगी।

इसके बाद, रजिस्ट्रार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से संपर्क किया और सहारा समूह द्वारा जमा की प्रकृति में योगदान स्वीकार करने के लिए गठित समितियों की वैधता पर अपनी राय लेने के लिए संपर्क किया। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।

सहारा समूह ने अपने बचाव में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की कानूनी राय प्रस्तुत की कि उसकी क्रेडिट सहकारी समितियां अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के दायरे में क्यों नहीं आएंगी। समूह ने यह भी कहा कि उसने कुछ भी नहीं किया है। क्रेडिट सहकारी उप-नियमों के तहत किसी सोसायटी के नियमित सदस्यों के योगदान के रूप में "अवैध" की अनुमति है।
आरबीआई के आधिकारिक प्रवक्ता को भेजे गए ईमेल और मैसेज का कोई जवाब नहीं आया।






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